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हिंदी भाषा की श्रेष्ठ पुस्तकों का चयन कैसे करें ? (2018)

आपने कुछ लोगों को हिंदी भाषा की प्रासंगिकता के विरुद्ध तर्क देते अवश्य सुना होगा। कुछ लोग ऐसा तर्क देते हैं कि हिंदी के दिन अब लद गए, क्योंकि न तो इसमें बहुत अच्छा करियर है और न ही इस भाषा में कोई प्रेमचंद या निराला सरीखे विद्वान बचे हैं। गूगल भी अपने डाटाबेस से हिंदी में तब तक कुछ नहीं दिखाता, जब तक की हिंदी फॉण्ट में आप इस सर्च इंजन के पेज पर टाइप न करें। हिंदी में पाठ्य सामग्री मिलना अत्यंत ही कठिन हो गया है, क्योंकि आज के नामी-गिरामी प्रकाशक हिंदी की किताबें छापना ही नहीं चाहते। भारत हो या विश्व के अन्य देश, सिर्फ अंग्रेजी भाषाओं की पुस्तकों का ही राज चलता है। हिंदी सिर्फ वही पढ़ते हैं जो जीवन में आगे नहीं बढ़ना चाहते, अंग्रेजी समझना जिनके बस में है ही नहीं, और इसी तरह की तमाम बातें ।

आज के तथाकथित बुद्धिजीवी चाहे कुछ भी तर्क दें, किन्तु सच्चाई यही है कि हिंदी किसी भी अन्य भाषा( अंग्रेजी सहित) की तुलना में कहीं से भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। हिंदी वास्तव में उन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त भाषाओं में से एक है जो प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं —जैसे यू.पी.एस.सी., नेट, आदि। ऐसे कई आकर्षक कैरियर के अवसर हैं जो इस भाषा में उपलब्ध हैं, जैसे कि इंटरप्रेटर या दुभाषिया जो कि प्रधान मंत्री और अन्य महत्वपूर्ण गणमान्य व्यक्तियों के साथ विदेश दौरों पर उनके साथ होते हैं, हिंदी अनुवादक, हिंदी अधिकारी, हिंदी सहायक, केंद्रीय / राज्य सरकारों के कई विभागों में प्रबंधक आदि।

यदि आप प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए पुस्तक की तलाश करेंगे तो आप पाएंगे की बाजार में इन किताबों की कोई कमी नहीं है। बल्कि आपको इतने सारे किताबें देखने को मिलेंगी की आप असमंजस में पड़ जाएंगे की आपके लिए कौन सी पुस्तक सही होगी। आपके आगे दुविधा स्थिति होगी। और आपको इसी स्थिति से उबरने के लिए मैं आपको कुछ टिप्स देना चाहूंगा। नीचे कुछ ऐसे ही टिप्स दिए गए हैं जिनकी मदद से मुझे पूरा विश्वास है कि आप अपने लिए सर्वोत्तम या यूँ कहें की श्रेष्ठ पुस्तकों का चयन कर सकेंगे:

  • अपनी आवश्यकताओं की स्पष्ट जानकारी: मैं समझता हूँ कि हिंदी में अपने लिए सबसे उपयुक्त किताब के चयन की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण है अपनी आवश्यकताओं की स्पष्टता। यदि आपको अपनी आवश्यकता समझने में कोई दुविधा नहीं है तो फिर निश्चय ही आपको पुस्तक के चयन में भी किसी प्रकार की दुविधा या असमंजस नहीं होगी। आप अपनी आवश्यकताओं की स्पष्टता के लिए कुछ होम वर्क कर सकते हैं जैसे की अपने कुछ मित्रों से सलाह, कुछ नामी-गिरामी प्रकाशकों के नामों की जानकारी, अपने शिक्षकों से विचार-विमर्श, नेट पर सर्च आदि।
  • विशुद्ध भाषा से परहेज: मेरे इस शीर्षक का यह अर्थ बिल्कुल न निकाला जाए की मैं ऐसे लेखकों का सम्मान नहीं करता जिनमें विशुद्ध भाषा में हिंदी लिखने की क्षमता है। मैं तो बल्कि उनके जैसा बनना चाहता हूँ। मेरा बस यही कहना है कि विशुद्ध साहित्य आपके दिमाग के ऊपर से गुजर सकता है और आपके लिए ऐसी पुस्तक पढ़ना नीरस हो सकता है। इसलिए बेहतर होगा यदि आप ऐसी पुस्तक का चयन करें जिसमें आपकी जरूरतों का पूरा ध्यान रखा गया हो, जरूरी नहीं की उसकी भाषा बहुत ही ज्यादा विशुद्ध हो।
  • विगत वर्षों के सुलझे एवं अनसुलझे प्रश्न: यह शीर्षक विशिष्ट रूप से विद्यार्थियों के लिए है। यदि आपको इंटरमीडिएट/ स्नातक/ स्नातकोत्तर आदि के लिए हिंदी में परीक्षोपयोगी पुस्तक चाहिए तो ऐसी पुस्तक का चयन करें जिसमें की सुलझे एवं अनसुलझे दोनों प्रकार के प्रश्नों का समावेश हो। सुलझे हुए प्रश्न आपको प्रश्नों के उत्तर लिखने के तरीके, शब्द सीमा आदि समझने में सहायता करेंगे जबकि अनसुलझे प्रश्न आपको इसी प्रकार से उत्तर लिखने के लिए प्रेरित करेंगे। याद रहे, आपकी पुस्तक में सिर्फ सुलझे या फिर सिर्फ अनसुलझे प्रश्न ही नहीं होने चाहिए, बल्कि इनमें इन दोनों का समुचित समावेश होना चाहिए।

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One comment

  1. बहुत सुन्दर आर्टिकल, हिंदी भाषा का योगदान अनमोल है

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