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विश्व पुस्तक मेला 2018 : क्यों, कैसे और किस तरह

ज्ञान की दृष्टि से भारत विश्व गुरु रहा है। जब विश्व के अधिकांश देश सभ्य भी नहीं हुए थे, हमारे देश के लोग सूर्य और चंद्र की गतिविधियों का अध्ययन करते  थे, खगोलीय गणनाएं करते थे। भारत ही वह देश है जिसने विश्व को शून्य का ज्ञान दिया। किताबों का प्रचलन भी हमारे देश में काफी पहले ही शुरू हो चुका था। रामायण, महाभारत जैसे महाकाव्य हमारे देश में हजारों साल पहले ही लिखी जा चुकी थी।

जब किताबों का प्रचलन पूरे विश्व में हो गया, तब एक ऐसे मंच की तलाश शुरू हुई जहाँ पर विश्व की तमाम लोकप्रिय किताबें, सुप्रसिद्ध लेखक और प्रकाशक एकत्रित हों। सबमें प्रत्यक्ष वैचारिक आदान हो।  इससे किताब से जुड़े सभी लोगों को एक प्लेटफार्म भी मिल जाएगा और प्रकाशकों को पाठकों की रूचि जानने, समझने का मौका मिल सकेगा और वे बेहतर किताबें छापने के लिए उत्साहित हो सकेंगे। इससे प्रकाशक, पाठक गण दोनों लाभान्वित होंगे। और विश्व पुस्तक मेला उसी सोच की देन है।

पुस्तक मेला

पुस्तक मेला बुद्धिजीवियों के लिए राष्ट्रीय त्यौहार से कम नहीं है। यह सही कहा जाता है कि पुस्तक मेला एकमात्र ऐसी जगह है जहाँ पर आपको ऐसे बोलना है ताकी सभी को समझ में आए, सिर्फ बुद्धिजीवियों को ही नहीं। वास्तव में पुस्तक मेला बुद्धिजीवियों के लिए मनपसंद भ्रमण स्थल होता है, पुस्तक प्रेमियों के लिए सुखद  अनुभव वाला होता है। साथ ही यह पढ़ने के प्रति रूचि रखने वालों को पुस्तकों के प्रति आकर्षण जगाता है।

 नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला, जो लोकप्रिय रूप से एन.डी.डब्ल्यू.बी.एफ. के रूप में जाना जाता है, उन सभी लोगों के लिए सबसे रोमांचक कार्यक्रम  है जो किसी न किसी रूप में  पुस्तकों से जुड़े हुए हैं। इसके आयोजन की जिम्मेदारी नेशनल बुक ट्रस्ट पर  है।  यह एक स्वायत्त संगठन है और किताबों को बढ़ावा देने की दिशा में काम करता है। संगठन इस देश के लोगों में पढ़ने की आदतों को पैदा करने का प्रयास करता है। यह संगठन एच.आर.डी. (मानव संसाधन विकास) मंत्रालय, भारत सरकार के तहत काम करता है।

मेले के सह-आयोजक भारतीय व्यापार संवर्धन संगठन है, जिन्हें आई.टी.पी.ओ. के नाम से जाना जाता है। यह वाणिज्य मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में काम करता है। यह देश के व्यापार और उद्योग की तेजी से विकास के लिए एक उपयुक्त मंच प्रदान करता है और भारत के व्यापार के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाता है।                                                       

 नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेलातब से अब तक

वर्ष आयोजन स्थल   क्षेत्र भाग लेने वाले  
पहला 1972 Windsor Place 7,780 200
दूसरा 1976 प्रगति मैदान 7,700 266
तीसरा 1978 प्रगति मैदान 12,000 554
चौथा 1980 प्रगति मैदान 16,800 450
पाँचवाँ 1982 प्रगति मैदान 21,000 540
छठा 1984 प्रगति मैदान 20,000 561
सातवाँ 1986 प्रगति मैदान 20,000 600
आठवाँ 1988 प्रगति मैदान 21,000 625
नौवाँ 1990 प्रगति मैदान 22,000 625
दसवाँ 1992 प्रगति मैदान 24,000 849
ग्यारहवाँ 1994 प्रगति मैदान 26,000 984
बारहवाँ 1996 प्रगति मैदान 32,000 984
तेरहवाँ 1998 प्रगति मैदान 21,600 1036
चौदहवाँ 2000 प्रगति मैदान 29,000 1281
पन्द्रहवाँ 2002 प्रगति मैदान 25,000 1065
सोलहवाँ 2004 प्रगति मैदान 36,000 1240
सत्रहवाँ 2006 प्रगति मैदान 38,300 1293
अठारहवाँ 2008 प्रगति मैदान 45,500 1343
उन्नीसवाँ 2010 प्रगति मैदान 41,069 1234
बीसवाँ 2012 प्रगति मैदान 45,913 1297
इक्कीसवाँ 2013 प्रगति मैदान 46,258 1092
 बाईसवाँ 2014 प्रगति मैदान 37,724 1023
तेईसवाँ 2015 प्रगति मैदान 36,549 1047
चौबीसवाँ 2016 प्रगति मैदान 36,548 886

(source: http://www.newdelhiworldbookfair.gov.in/16___history-of-ndwbf_ndwbf.ndwbf_page)

 विश्व पुस्तक मेले में गुल्ली बाबा

प्रकाशन के क्षितिज में “गुल्ली बाबा पब्लिशिंग हाउस प्राइवेट लिमिटेड” सबसे चमकता सितारा है।” यह डेढ़ दशक से भी पुरानी प्रकाशन कंपनी है । हम इग्नू की किताबें और अध्ययन सामग्री, एन.आई.ओ.एस. पाठ्यक्रम की किताबें, उनके पिछले सालों के हल प्रश्नपत्र, और महत्वपूर्ण परीक्षा नोट्स, कार्य, परियोजना रिपोर्ट सारांश आदि प्रकाशित करते हैं। इनके अलावा हम उपन्यास, कविताओं, योग, ज्योतिष, स्वास्थ्य, जीवन विज्ञान और समकालीन विषयों पर बहुतायत में पुस्तकें प्रकाशित करते हैं।

 

विश्व पुस्तक मेलों में गुल्लीबाबा का इतिहास काफी गौरवपूर्ण रहा है। हमारी लोकप्रिय किताब “व्हेन ए स्टार इज बॉर्न” को २० वें विश्व पुस्तक मेला में “ओपनिंग बुक” का सम्मान प्राप्त हुआ।  तब से लेकर आज तक हमारे प्रकाशन की पुस्तकों का कद बढ़ता ही रहा है। हमारी किताबें न केवल भारत में आयोजित विश्व पुस्तक मेलों में, बल्कि जैसे फ्रैंकफर्ट, संयुक्त अरब अमीरात, यू.के. आदि में अपना सिक्का ज़माने में कामयाब रही है।

 

हमारी प्रचलित किताबें

1) Yoga: Yoga & Ayurveda for all,
2) The Lover: You Have Been Missing,
3) “Mera” Sukh “Kiske “Hath”,
4) Fitness Forever,
5) Dadi Janki Dwara Chune Gaye Heere Moti,
6) Healing Touch: Samay Ki Pukar,
7) Vriksh Lagaye: Grahon Ko apne anukool banaye

हमारी किताबें उच्च गुणवत्ता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इग्नू, एन. आई. ओ. एस. की पुस्तकें हों, उपन्यास हो,  या समसामयिक विषयों पर लिखी हुई कोई पुस्तक, गुलीबाबा हमेशा संबंधित पाठकों की जुबान पर होता है। हमारी पुस्तकों की विशेषताओं में से कुछ का वर्णन नीचे दिया गया है:

  • अत्यधिक सक्षम और योग्य व्यक्तियों द्वारा लिखित
  • आसानी से समझने योग्य भाषा
  • संक्षिप्त लेकिन पूरी जानकारी
  • उन्नत ज्ञान प्रदान करने वाली
  • कठिन शब्दों की व्याख्या
  • चिर-स्थाई बाइंडिंग

हम यहां भी उपलब्ध हैं: Facebook | Twitter
वर्ल्ड बुक मेला 2018 तारीख स्थान और समय

तिथि: 6 – 14 जनवरी 2018

स्थल: प्रगति मैदान, नई दिल्ली

समय: 11 AM- 8PM

गुल्लीबाबा वर्ल्ड बुक फेयर स्पेशल डिस्कोउन्ट्स

1000 रुपये मूल्य की पुस्तकों की खरीद करें और प्राप्त करें

  • 2100 रुपये मूल्य की एक टाइटन लेडीज/जेंट्स घड़ी
  • 1000 रुपये मूल्य का भोजन– आपको अपने एक प्रिय के साथ
  • हमारी किताब स्टॉल से 2100 रूपये की पुस्तकें बिल्कुल मुफ़्त
  1. हमारे सोशल मीडिया चैनलों, फेसबुक, लिंक्डइन, ट्विटर, इंस्टाग्राम, पिंटरेस्ट आदि को लाइक/सब्सक्राइब करें और 500 रुपये के मूल्य का उपहार (पेन, चाइचेन, योग बुक, एग्जिक्यूटिव पैड, स्टिकी नोट्स आदि)प्राप्त करें । तथा हमारे गुलीबाबा मैस्कॉट के साथ एक तस्वीर ।

वर्ल्ड बुक फेयर 2018 टिकट

वयस्क 30 / –

बच्चे नि: शुल्क प्रवेश

प्रति टिकट लागत: रु .30 / –

विशेष उल्लेख: स्कूली बच्चे अपनी पहचान पत्रों के साथ मुफ्त प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं।

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