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विश्व पुस्तक मेला 2018 पुस्तक अनावरण समारोह

विश्व पुस्तक मेला 2018 पूरे जोरों पर है।  विश्व पुस्तक मेला, २०१८  में भारत के विभिन्न प्रांतों से विविध रूचि, चाव और शौक रखने वाले  पुस्तक प्रेमियों का जमावड़ा लगा है। दिल्ली पुस्तक मेला, प्रगति मैदान में पुस्तक अनावरण कार्यक्रम निश्चय ही आपको लुभाएंगी।  आप स्वयं जान पाएंगे की कैसे पुस्तक का अनावरण होता है, कितने नामी गिरामी लोग वहां उपस्थित हो रहे हैं। बहुत सारे बुद्धिजीवियों का एक साथ जमावड़ा देख कर आप निश्चय ही रोमांचित हो उठेंगे।

इग्नू  से सम्बंधित किताबों के लिए विश्वविख्यात गुल्लीबाबा पब्लिशिंग हाउस प्राइवेट लिमिटेड का सफर विश्व पुस्तक मेला, २०१८ में भी शानदार रहा है। न केवल इग्नू से कोर्स करने वाले विद्यार्थी गण, बल्कि ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म जैसी विषयों के मर्मज्ञ भी गुल्ली बाबा के पुस्तकों को चाव से पढ़ते एवं खरीदते दिखे। इस प्रकाशन में पहले से ही ७०० से ज्यादा टाइटल्स हैं और नित नयी किताबों का इसमें समावेश होता चला जा रहा है।  यदि सिर्फ विश्व पुस्तक मेला, २०१८ की ही बात करें तो  शायद ही ऐसा कोई दिन गुजरता है जबकि गुल्लीबाबा की किसी न किसी  पुस्तक का अनावरण न हो।

“ज्योतिष: प्रेम-संबंध एवं वैवाहिक जीवन” और दीवानगी की मधुशाला” का अनावरण

८ जनवरी, २०१८ को दो पुस्तकों का अनावरण कार्यक्रम हुआ—– ज्योतिष: प्रेम-संबंध एवं वैवाहिक जीवन और दीवानगी की मधुशाला। समारोह में देश-विदेश के शिक्षा, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े कई नामी-गिरामी लोगों ने शिरकत की। प्रेस से लेकर पब्लिक तक जबर्दश्त जमावड़ा देखा गया। पुस्तकों के प्रति लोगों की उत्सुकता और पुस्तक प्रेमियों की भीड़ को देख अजय देवऋषि (ज्योतिष: प्रेम-संबंध एवं वैवाहिक जीवन), सतपाल ‘शिवोहम (सह लेखक: दीवानगी की मधुशाला) भावुक हो उठे।

पुस्तकों के बारे में :-

ज्योतिष: प्रेम-संबंध एवं वैवाहिक जीवन

इस पुस्तक में ज्योतिष: प्रेम-संबंध एवं वैवाहिक जीवन में सुबह-अशुभ घटनाओं का स्पष्ट रूप से वर्णन करने का यथासंभव प्रयास किया गया है। लेखक ने इस पुस्तक में ज्योतिष के विशेष नियम जैसे कि-प्रेम भाव अर्थात पंचम भाव का सप्तम भाव या विवाह से संबंध, तृतीय भाव, जिसे प्रेम की जड़ भी कहा जाता है, का संबंध प्रेम भाव से तथा एकादश भाव जो इच्छापूर्ति का भाव है, उसका पंचम व सप्तम भाव से संबंध तथा ग्रहों की आपस में शुभ-अशुभ युति, उनका प्रेम भाव व विवाह भाव पर पड़ने वाले प्रभाव आदि के अनेक उपयोगी और बहुमूल्य सिद्धांतों का विशद वर्णन करके पाठकों के लिए प्रेम-संबंधों व वैवाहिक जीवन में सुख की प्राप्ति एवं दुःख के निवारण हेतु मार्गदर्शन प्रस्तुत किया है।

दीवानगी की मधुशाला

कोई भी व्यक्ति आज समाज में घटित होने वाले क्रियाकलापों, जैसे—राजनीति की उठा-पटक व समाज में घटित हो रहे रोज के अपराधों को देखकर बड़ा ही व्यथित और परेशान होता है। प्रस्तुत पुस्तक में कवि तथा लेखक “श्री अजय देवऋषि” तथा “श्री सतपाल शिवोहम” ने अपनी कविताओं के संग्रह के माध्यम से एक ओर जहाँ समाज में फैली विकृतियों एवं रूढ़ियों की ओर पाठकों का ध्यान आकर्षित किया है, वहीं दूसरी ओर जन-मानस की कोमल भावनाओं को उद्वेलित करके पारस्परिक प्रेम को जगाने का भी अभूतपूर्व प्रयास किया गया है।

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